अरे ओ! अजनबी तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
बिना जान पहेचान ,जब तुम मेरी फिकर सी करने लगते हों
तुम बहुत आपने से लगने लगते हों
बिना जान पहेचान ,जब तुम मेरी फिकर सी करने लगते हों
तुम बहुत आपने से लगने लगते हों
जब दर्द मेरा तुम प्यार से बाटा सा करते
बिना खामयाजा दिए मेरी गलतियों पर पर्दा से करते हों
तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
बिना किसी दुनियादारी से जब तुम मेरे गिले शिकबे सुना करते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
वो कुछ पलों की मुलाकात में तुम अजनबी से मेरे हमदर्द से बनजाते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगते हो
हाँ इस वीरान नगरी में तुम बहुत आपने से लगते हों !!
तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
बिना किसी दुनियादारी से जब तुम मेरे गिले शिकबे सुना करते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
वो कुछ पलों की मुलाकात में तुम अजनबी से मेरे हमदर्द से बनजाते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगते हो
हाँ इस वीरान नगरी में तुम बहुत आपने से लगते हों !!
Nice
ReplyDeleteTHANKYOU
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