Wednesday, June 20, 2018

Ajnabi tum apne se lagne lagte ho

sanyatikarya
अरे ओ! अजनबी  तुम बहुत अपने से लगने लगते  हों
  बिना जान पहेचान  ,जब तुम मेरी फिकर सी करने लगते हों
      तुम बहुत आपने से लगने लगते  हों
 जब दर्द मेरा तुम प्यार से बाटा सा करते 
बिना खामयाजा  दिए मेरी गलतियों पर पर्दा से करते हों
  तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
  बिना किसी दुनियादारी से  जब तुम मेरे गिले शिकबे सुना करते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगने लगते हों
 वो  कुछ पलों की मुलाकात में तुम अजनबी से मेरे हमदर्द से बनजाते हों
हाँ तुम बहुत अपने से लगते हो
 हाँ इस वीरान नगरी में तुम बहुत आपने से लगते हों !!
  
  


sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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