Friday, May 12, 2017

बाल मजदूर

sanyatikarya
जब तो पैसे दे दो  साहब ,
भूख लगी दो पैसे दे साहब,
 कहने पर जब कोई गाली उन्हें सुनाता है
देख  नज़ारा  उस पल का , ये  चेहरा शर्मशार  हो जाता है || 1||    
     
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एक बच्चा  जब भूख मिटाने ,
भरी दुपहरी काम पे जाता है
मज़बूरी में बच्चो का  बचपन खो जाता है
अपने प्यारे बचपन में , पीठ पे बोझ उठाता है
 देख नज़ारा ......................................... शर्मशार  हो जाता है || 2 ||
 
   घने - घने कोहरे में , चादर  से लिपटे ,दो रोटी को
    सड़को पे नाचते  गाते है
कुछ को खाना मिलता है और कुछ भूखे पेट  सड़क किनारो पर सो जाते है
फ़टे पुराने कपडे , पाँव में टूटी चप्पल
 आखो में बिखरे सपने लेकर जब कोई बच्चा झोपड़ -पट्टी में रोता  है
   देख नज़ारा ......................................... शर्मशार  हो जाता है || 3 ||
   
   जो  पैसा इनकी शिक्षा के काम में आना था
   बो  राजकोष में जाकर , फिर काला धन बन जाता है
   ये  पहुँच पास  राज राहिशों के , उनके जीवन को  चमकाता  है
     तब  इन मासूमो के जीवन में घोर  अँधेरा  छा  जाता है
      पढ़कर इनकी जीवन गाथा  जब कोई चैन से सो जाता  है
 देख नज़ारा ......................................... शर्मशार  हो जाता है || 4 ||

sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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