जब तो पैसे दे दो साहब ,
भूख लगी दो पैसे दे साहब,
कहने पर जब कोई गाली उन्हें सुनाता है
देख नज़ारा उस पल का , ये चेहरा शर्मशार हो जाता है || 1||
एक बच्चा जब भूख मिटाने ,
भरी दुपहरी काम पे जाता है
मज़बूरी में बच्चो का बचपन खो जाता है
अपने प्यारे बचपन में , पीठ पे बोझ उठाता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 2 ||
घने - घने कोहरे में , चादर से लिपटे ,दो रोटी को
सड़को पे नाचते गाते है
कुछ को खाना मिलता है और कुछ भूखे पेट सड़क किनारो पर सो जाते है
फ़टे पुराने कपडे , पाँव में टूटी चप्पल
आखो में बिखरे सपने लेकर जब कोई बच्चा झोपड़ -पट्टी में रोता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 3 ||
जो पैसा इनकी शिक्षा के काम में आना था
बो राजकोष में जाकर , फिर काला धन बन जाता है
ये पहुँच पास राज राहिशों के , उनके जीवन को चमकाता है
तब इन मासूमो के जीवन में घोर अँधेरा छा जाता है
पढ़कर इनकी जीवन गाथा जब कोई चैन से सो जाता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 4 ||
भूख लगी दो पैसे दे साहब,
कहने पर जब कोई गाली उन्हें सुनाता है
देख नज़ारा उस पल का , ये चेहरा शर्मशार हो जाता है || 1||
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| pic courtesy - pinterest.com |
भरी दुपहरी काम पे जाता है
मज़बूरी में बच्चो का बचपन खो जाता है
अपने प्यारे बचपन में , पीठ पे बोझ उठाता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 2 ||
घने - घने कोहरे में , चादर से लिपटे ,दो रोटी को
सड़को पे नाचते गाते है
कुछ को खाना मिलता है और कुछ भूखे पेट सड़क किनारो पर सो जाते है
फ़टे पुराने कपडे , पाँव में टूटी चप्पल
आखो में बिखरे सपने लेकर जब कोई बच्चा झोपड़ -पट्टी में रोता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 3 ||
जो पैसा इनकी शिक्षा के काम में आना था
बो राजकोष में जाकर , फिर काला धन बन जाता है
ये पहुँच पास राज राहिशों के , उनके जीवन को चमकाता है
तब इन मासूमो के जीवन में घोर अँधेरा छा जाता है
पढ़कर इनकी जीवन गाथा जब कोई चैन से सो जाता है
देख नज़ारा ......................................... शर्मशार हो जाता है || 4 ||

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