Saturday, August 18, 2018

आरंभ तेरी जीत का हैं

sanyatikarya
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  अन्त नहीं ,प्रारंभ हैं 
 आरंभ तेरी जीत का हैं  
 देख मृदंग यह कह रहा हैं || १ || 
    चल उठ मात देना  , अब आंधियो को  हैं 
   पार  करना राह के विशाल चट्टानों  को हैं
 अंत  नहीं   ................................मृदंग यह कह रहा हैं || २ || 

  उठे जो तुझ पे सवाल है 
 वक़्त आगया  देना उनका ज़वाब हैं 
छलनी सीने की  यह गुहार है 
 जीत की यह पुकार हैं  
अंत  नहीं   .................................मृदंग यह कह रहा हैं  || ३ || 
              

sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

2 comments:

  1. Splendid. Absolutely splendid . U have a built in power to inspire in a breathtaking way.... appreciations.

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