Friday, December 31, 2021

नया सफर

sanyatikarya

 बहूत  ऊबड़ खाबड़ सा रहा है 

यह सफर, दो हज़ार   इक्कीस

उन्नीस , बीस सा रहा है ,यह इक्कीस

जो ढाल बन कर  दुसरो को बचाते थे अक्सर ,

मैंने  ऎसे हौसले को तन्हाई  में टूटते देखा  है

अपेक्षाओ के तले सपनो को दफन होते देखा है 

 ज़िम्मेदारियो में बचपन खोते देखा है  

ज़िंदा ज़िस्म में घुटती रूहो को भी देखा है 

मौत के फंदे छुपाए महफूज़ किवारो  को भी  देखा है

खुद  की खुद से रुसवाई भी देखी है

तो अपनो की  अपनो से लड़ाई भी देखी  है

बनती - बिगड़ती ऐसी कहानियॉ देखी है 


यह सफर की कुछ यादे है

जो खो गया , उसकी यादे साथ लेकर  चले है 

अब वाईस  की और चले है हम 




sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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