Sunday, June 17, 2018

बच्चो के प्यारे - प्यारे पापा

sanyatikarya
 अनुशासन का  पाठ हैं पढ़ाया
 कांधे पे सारा जग है घुमाया
 जब - जब  रोऊ ,आपने ही  हँसाया
 जब - जब मैं रुठी, आपने ही  मनाया
 प्यार से मुझको सदा ,आपने ही  सहेलाया
  
 जग का  अच्छा - बुरा  ,आपने ही  सिखलाया
परेशानी रूपी जीवन को पार करना आपने ही सिखलाया 
 हर हार को जीत में बदलना ,आपने हैं सिखाया 
  सदा सच के रास्ते पे चलना, आपने हैं  सिखलाया
 नाम, मान, सम्मान, गौरव, प्रतिष्ठा सब, आप से  हैं पाया
 आपको  पाया तो सारा  संसार है पाया 
 संस्कारो का बीज मुझमे ,आपने ही बोया 
 खुद हार कर मुझे ,आपने  ही जिताया
  
ज्ञान की ज्योति मुझमें ,आपने ही  की प्रज्ज्वलित 
   आप  ओर कोई नही आप हो मेरे प्यारे- प्यारे  पापा
अनुशासन का पाठ ..... घुमाया |
  
  
  

  
  
  

sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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