अनुशासन का पाठ हैं पढ़ाया
कांधे पे सारा जग है घुमाया
जब - जब रोऊ ,आपने ही हँसाया
जब - जब मैं रुठी, आपने ही मनाया
प्यार से मुझको सदा ,आपने ही सहेलाया
जग का अच्छा - बुरा ,आपने ही सिखलाया
परेशानी रूपी जीवन को पार करना आपने ही सिखलाया
हर हार को जीत में बदलना ,आपने हैं सिखाया
सदा सच के रास्ते पे चलना, आपने हैं सिखलाया
नाम, मान, सम्मान, गौरव, प्रतिष्ठा सब, आप से हैं पाया
आपको पाया तो सारा संसार है पाया
संस्कारो का बीज मुझमे ,आपने ही बोया
खुद हार कर मुझे ,आपने ही जिताया
ज्ञान की ज्योति मुझमें ,आपने ही की प्रज्ज्वलित
आप ओर कोई नही आप हो मेरे प्यारे- प्यारे पापा
अनुशासन का पाठ ..... घुमाया |
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