Thursday, January 13, 2022

पिता के भाव पुत्री की विदाई पर

sanyatikarya

 एक पिता के अपनी पुत्री की शादी में भाव 


प्यारी लाडो,

क्या  लिखूं  तुझ पर ,

तू मेरा आसमान का वो तारा है

जो रोशन सबको करता  है ,

तू हर ताले की  चाबी है,

तू  खुशियो का  भंडार है,

तू  माँ की  परछाई है,

तू   इत्र  है गुलाल है,

तू घर की  जान है,

तू बेटी नहीं ,बेटा है मेरा

मेरे कलेजे का टुकड़ा है,

तू  कहने को तो मेरा अंश है,

पर जिस के बिन में शून्य ,तू वो  रिक्त स्थान है

तू  हर  रिश्ते की डोर है,

तू मेरे जीवन की सबसे अनमोल  इनायत है ,

क्या लिखूं अब ,बेटा

आज  तुझे देखा लाल जोड़े में ,आँखे नम  सी हो गयी

पता ही नही चला ,कब मेरी लाडो इतनी बड़ी हो गयी

वो नन्हे हाथ आज मेहँदी से सज गए

वो नन्हा  सर आज दुपट्टा से सज गया

वो नन्हे पैर ,पायल से सज गए

(ऐसा पहली  बार नही था आज , बचपन मे कई बार देखा है तुझे ऐशे, पर आज तेरे पापा नही  देख पा रहे )


 मेरी लाडो का दूल्हा ,आज सच मे उसे लेने आ गया,

 मेरी बगिया का फूल आज कोई और का हो गया,

रीत ज़माने की लाडो, निभा रहा हूं,

पर तुझे खुद से दूर नही कर रहा हूं ,

तू तो मेरा बेटा है ,खाश आज सच हो जाए ,

और तू रुक जाए पर लड़ो ,लाडो है मेरी न ,

रीत  है बस यह  और कुछ नही  खुद को समझा दिया है

कल से तेरा उपनाम  बदल  जाएगा  पर पिता नही ,

तू मेरा गुरुर थी, है ,और रहेगी,

इस  विश्वास से  तुझे विदा कर रहा हूं

तेरे नए  रिश्तो से  जोड़ रहा हूं  |



sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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