एक पिता के अपनी पुत्री की शादी में भाव
प्यारी लाडो,
क्या लिखूं तुझ पर ,
तू मेरा आसमान का वो तारा है
जो रोशन सबको करता है ,
तू हर ताले की चाबी है,
तू खुशियो का भंडार है,
तू माँ की परछाई है,
तू इत्र है गुलाल है,
तू घर की जान है,
तू बेटी नहीं ,बेटा है मेरा
मेरे कलेजे का टुकड़ा है,
तू कहने को तो मेरा अंश है,
पर जिस के बिन में शून्य ,तू वो रिक्त स्थान है
तू हर रिश्ते की डोर है,
तू मेरे जीवन की सबसे अनमोल इनायत है ,
क्या लिखूं अब ,बेटा
आज तुझे देखा लाल जोड़े में ,आँखे नम सी हो गयी
पता ही नही चला ,कब मेरी लाडो इतनी बड़ी हो गयी
वो नन्हे हाथ आज मेहँदी से सज गए
वो नन्हा सर आज दुपट्टा से सज गया
वो नन्हे पैर ,पायल से सज गए
(ऐसा पहली बार नही था आज , बचपन मे कई बार देखा है तुझे ऐशे, पर आज तेरे पापा नही देख पा रहे )
मेरी लाडो का दूल्हा ,आज सच मे उसे लेने आ गया,
मेरी बगिया का फूल आज कोई और का हो गया,
रीत ज़माने की लाडो, निभा रहा हूं,
पर तुझे खुद से दूर नही कर रहा हूं ,
तू तो मेरा बेटा है ,खाश आज सच हो जाए ,
और तू रुक जाए पर लड़ो ,लाडो है मेरी न ,
रीत है बस यह और कुछ नही खुद को समझा दिया है
कल से तेरा उपनाम बदल जाएगा पर पिता नही ,
तू मेरा गुरुर थी, है ,और रहेगी,
इस विश्वास से तुझे विदा कर रहा हूं
तेरे नए रिश्तो से जोड़ रहा हूं |
❤️❤️❤️❤️❤️
ReplyDeleteBeautiful
ReplyDeleteNice 👍
ReplyDelete