आज फिर किसी के अस्तित्व पर उंगली उठी है
आज फिर कही द्रोपती का चीर हरण हुआ है
आज फिर कोई दामिनी चलती बस से नगन फेंकी गयी है
आज फिर किसी निर्दोष को सजा हुई है
आज फिर कोई कही भूखा सोया है
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| pic courtesy - pinterest.com |
आज फिर कोई दो बूंद पानी के लिए तरसा है
आज फिर कोई गरीब रोड पर सोया है
आज फिर कई लाखो बच्चे मजबूर है मजदूरी करने को
अरे ! आज फिर करप्शन भ्रष्टाचार ने अपना रुख दिखाया है
आज फिर कोई कोई नेता पैसो के लिए बिका है
आज फिर कोई लड़की का सौदा हुआ है
आज फिर कोई भाई अपने भाई का खून करते पकड़ा गया है
चंद पैसो के लिए
अरे ! आज कोई सागा -सम्बन्दि नहीं रहा
आज सगा है तो पैसा
बिकने लगे है सब रिश्ते पैसो से
ऐ ! मनुष्य अब तो शर्म कर यह सब देख कर निरजीव भी जीवित हो जाते है
आस्मा पेड़ भगवान सब अपना रुख दिखाते है
आस्मा में बिजली अर्थात उसका क्रोध सिमटता है
पेड़ से तेज हवाए भी अपना रुख दिखाती है
ऊपर वाला जब यह सब देख रोता है तब बारिश होती है
और हम मनुष्य उसे बिन मौसम बारिश बोल देते है
मनुष्य की क्या बात हाथी में घोडा
घोड़े में हाथी नज़र आता है
सोचना जरूर यह नज़रो का खोट है या बिचारो का

Ending is osome
ReplyDeleteIt is good poetry
ReplyDeleteGood work
ReplyDeleteGood work
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