Thursday, November 24, 2016

भ्रष्टाचार (एक विकट समस्या) ...

sanyatikarya

            हम सभी जानते है की  भ्रष्टाचार क्या है ? या यु कहु की  भ्रष्टाचार से हम सब लोग वाकिफ है और यह हमारे कोई नही बात नही  हैं । 
                                         भ्रष्टाचार का अर्थ है   बुरा  व्यवहार यानि मार्ग से भटका आचरण । आजकल मनुष्य स्वार्थी बनकर रह गया है ।  उसके प्रत्येक कार्य में उसका स्वार्थ छुपा होता  है । आज जहा भी दृष्टि जाती है वहा स्वार्थ की संतान   भ्रष्टाचार को फल हुआ पाते  है । 
                                                 भ्रष्टाचार के कारण ही समाज, सरकारी कार्यालयो  में वेइमानि ,मिलावट ,छल, रिस्वतखोरी आदि का बोलबाला है । वर्तमान युग में  भ्रष्टाचार ने अपने पैर चारो तऱफ पसार लिए है । आज जिधर देखो वहाँ   भ्रष्टाचार ही   भ्रष्टाचार है । हर एक  क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनेको रूप देखे जाते है । 
      मुख्य रूप से राजनैतिक  भ्रष्टाचार ,ब्यबसाहिक  भ्रष्टाचार चिंता का विषय है । सरकारी या  गैर - सरकारी कार्यालयो में तो बाबु से लेकर उच्च अधिकारी तक विना रिश्वत के कार्य  करने को तैयार नहीं होते । 
                               राजनैतिक  भ्रष्टाचार के तो कहने ही क्या? चुनाव जीतने के लिए अपहरण ,हत्या ,आतंक अदि का सहारा लिया जाता है । नेता चुनाव के लिए वादे करते है और उसे भूल जाते है । चुनाव जीतने के बाद  ऐसे  नेतायो से हमारा देश सदमार्ग पर चल सकता है क्या ? रोज - रोज  समाचार -पत्रो में दूध -घी में मिलावट ,दाल - चावल में पत्थर ,मसलो में रंग की मिलावट ,नकली दवईयों के बारे में पढ़ा  एवं  सुना जा सकता है । आज कल नकली और असली की पहचान करना तो बहुत कढिन हो गया है । 
                         बढ़ती मंहगाई  ही भ्रष्टाचार का प्रमुख कारण है ;-
१.  हम सब को एक जुट होना पड़ेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाये जाने चाहिए । हम सब को स्वार्थ तियाग कर अपना मनोबल बढ़ाना चाहिए । हम सब अगर एक जुट होंगे तो भ्रष्टाचार मिट सकता है । 
२. हमे  भ्रष्टाचार का विरोध करना चाहिए ताकि इस विषेले वृक्ष का नाश किया जा सके । 
                                              ''आज हम मिलकर कसम ये खाए 
                                                  भ्रष्टाचार को देश से दूर भगाएं'
                                                  ना तो   भ्रष्टाचार फेलाए और 
                                                              ना ही फैलाने दे ।''
                             
 

sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

2 comments:

Coprights @ 2016, Blogger Template Designed By Templateism | Templatelib