भ्रष्टाचार का अर्थ है बुरा व्यवहार यानि मार्ग से भटका आचरण । आजकल मनुष्य स्वार्थी बनकर रह गया है । उसके प्रत्येक कार्य में उसका स्वार्थ छुपा होता है । आज जहा भी दृष्टि जाती है वहा स्वार्थ की संतान भ्रष्टाचार को फल हुआ पाते है ।
भ्रष्टाचार के कारण ही समाज, सरकारी कार्यालयो में वेइमानि ,मिलावट ,छल, रिस्वतखोरी आदि का बोलबाला है । वर्तमान युग में भ्रष्टाचार ने अपने पैर चारो तऱफ पसार लिए है । आज जिधर देखो वहाँ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है । हर एक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के अनेको रूप देखे जाते है ।
मुख्य रूप से राजनैतिक भ्रष्टाचार ,ब्यबसाहिक भ्रष्टाचार चिंता का विषय है । सरकारी या गैर - सरकारी कार्यालयो में तो बाबु से लेकर उच्च अधिकारी तक विना रिश्वत के कार्य करने को तैयार नहीं होते ।
राजनैतिक भ्रष्टाचार के तो कहने ही क्या? चुनाव जीतने के लिए अपहरण ,हत्या ,आतंक अदि का सहारा लिया जाता है । नेता चुनाव के लिए वादे करते है और उसे भूल जाते है । चुनाव जीतने के बाद ऐसे नेतायो से हमारा देश सदमार्ग पर चल सकता है क्या ? रोज - रोज समाचार -पत्रो में दूध -घी में मिलावट ,दाल - चावल में पत्थर ,मसलो में रंग की मिलावट ,नकली दवईयों के बारे में पढ़ा एवं सुना जा सकता है । आज कल नकली और असली की पहचान करना तो बहुत कढिन हो गया है ।
बढ़ती मंहगाई ही भ्रष्टाचार का प्रमुख कारण है ;-
१. हम सब को एक जुट होना पड़ेगा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कानून बनाये जाने चाहिए । हम सब को स्वार्थ तियाग कर अपना मनोबल बढ़ाना चाहिए । हम सब अगर एक जुट होंगे तो भ्रष्टाचार मिट सकता है ।
२. हमे भ्रष्टाचार का विरोध करना चाहिए ताकि इस विषेले वृक्ष का नाश किया जा सके ।
''आज हम मिलकर कसम ये खाए
भ्रष्टाचार को देश से दूर भगाएं'
ना तो भ्रष्टाचार फेलाए और
ना ही फैलाने दे ।''
I m with u
ReplyDeleteYes very true
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