"बड़ी अजीब दुनिया है
ईद गिर्द लोगो का मेला है
उन मेलो में बिकते खरीदते अपनों को देखा है "
गिन तोल मोल कर लेते देते है
अपनों की यादों के दिए फिर भी दिल में प्रज्जुलित करेहै
फिर भी तोल मोल कर लेते देते है
ईद गिर्द लोगो का मेला है
उन मेलो में बिकते खरीदते अपनों को देखा है
"बड़ी अजीब दुनिया है
दुनिया में नारी का सम्मान
गूँगे की आवाज
आंधो की आँखे
बेहेरे की धुन
न्यायालय की कुर्सी तक बिक जाती है
"बड़ी अजीब दुनिया है
ईद गिर्द लोगो का मेला है
उन मेलो में बिकते खरीदते अपनों को देखा है "
खैरियत की कोई बात न है
कलयुग में तो युधिस्ठिर ने अपनी पत्नी तक
जुए में हारी थी
"बड़ी अजीब दुनिया है
ईद गिर्द लोगो का मेला है
उन मेलो में बिकते खरीदते अपनों को देखा है "
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