केहेते हैं की बेटा -बेटी एक समान ,
बेटा बंश है तो अंश हैं बेटियां
पर क्यों हर बार शर्मशार होती बेटियाँ
पर क्यों बीच चौराहो पे नीलाम होती बेटियाँ
यह मत करो ,वो मत करो , यह कैसे कपडे है
चार लोग देखेंगे तो क्या बोलेंगे
क्यों यह नारे कस्ती दुनियाँ
क्या कसूर है उसका, क्या गुनाह है उसका होना बेटी
या ज़माने की सोच का है असर ,या नियतो का
क्यों मेहफुज नहीं है बेटियाँ , नारियाँ
क्या यही हैं हकीकत आज की
क्यों
कौन हैं इसका असली जिम्मेदार
आखिर कौन ??
बेटा बंश है तो अंश हैं बेटियां
पर क्यों हर बार शर्मशार होती बेटियाँ
पर क्यों बीच चौराहो पे नीलाम होती बेटियाँ
यह मत करो ,वो मत करो , यह कैसे कपडे है
चार लोग देखेंगे तो क्या बोलेंगे
क्यों यह नारे कस्ती दुनियाँ
क्या कसूर है उसका, क्या गुनाह है उसका होना बेटी
या ज़माने की सोच का है असर ,या नियतो का
क्यों मेहफुज नहीं है बेटियाँ , नारियाँ
क्या यही हैं हकीकत आज की
क्यों
कौन हैं इसका असली जिम्मेदार
आखिर कौन ??
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