Sunday, May 6, 2018

बातचीत का नया तरीका - एक बिचार मेरा एक आप का

sanyatikarya


     केहेते हैं की  बेटा -बेटी एक समान ,
     बेटा बंश  है  तो अंश  हैं  बेटियां
      पर  क्यों   हर बार शर्मशार  होती  बेटियाँ
      पर क्यों   बीच  चौराहो  पे   नीलाम  होती  बेटियाँ
      यह मत करो ,वो मत करो  , यह कैसे कपडे है
     चार लोग देखेंगे तो क्या बोलेंगे
     क्यों यह नारे कस्ती  दुनियाँ
     क्या कसूर है उसका, क्या  गुनाह   है उसका होना बेटी
    या  ज़माने की  सोच का  है असर  ,या नियतो  का
     क्यों मेहफुज  नहीं  है  बेटियाँ , नारियाँ 
      क्या   यही हैं  हकीकत  आज की
         क्यों
     कौन  हैं  इसका असली जिम्मेदार                                 
      आखिर कौन  ??
 
 


 

 

 
   
       
 




 
 
             

sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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