Tuesday, September 27, 2016

aashayein

sanyatikarya
image courtesy-pre02.deviantart.net

वक़्त हांथों से फिसलकर माटी  की तरह दूर यूं  गिरने से लगा ।
अपार इछ्यायें आशाओं का मौसम से यूँ खिलने से लगा । 

कुछ अजनबी सी इच्छाएं मन में खिल चुकी कुछ खिलने को हैं ।  
बहती हुई धरा नदी की सिंधु से मिलने लगी । 

हर दिन नई उम्मीद का जल बूँद सा बढ़ने लगा । 
करने को पूरा ख्बाब ये मन खुद बा खुद मचलाने सा लगा । 

उमींदों से भरा दिल अब धड़कने है लगा 
अब तो आसमा भी  कदमो के निचे सा लगने लगा 



sanyatikarya / Author & Editor

नमस्कार राम राम मेरे प्यारे श्रोताओं मेरा नाम सान्या है। मैं एक पेशे से एक डॉक्टर हूं। मै बीमारी का भी इलाज करती हूं दवाई से और कविताओं से भी विचलित मन का इलाज करती हूं। मेरी समस्त कविताएं संजीदा और प्रेरणादायक मुद्दे पर होती है जो इंसान को जीने के लिए प्रेरित करती है तो आप सभी कवि मित्रो और साहित्य प्रेमियों का मै सान्या आपका स्वागत करती हू|

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